📰 पूरी खबर:
भोपाल:मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति (Promotion) को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल ने विभागीय जांच, दंड प्रभावशील होने और आपराधिक प्रकरण लंबित होने के कारण प्रदेश के 78 अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त कर दी है। पुलिस मुख्यालय के इस सख्त आदेश के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
क्यों रद्द हुई पदोन्नति? जानिए नियम और वजह:
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार: प्रदेशभर के उपनिरीक्षकों (SI) और कार्यवाहक निरीक्षकों (Acting TI) को पदोन्नत कर 'निरीक्षक' (TI) बनाने का आदेश पूर्व में जारी किया गया था।
जब इन्हें नई पदस्थापना पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) ने PHQ को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि सूची में शामिल 78 अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) लंबित है, कोई अनुशासनात्मक दंड लागू है या न्यायालय में आपराधिक मामला विचारधीन है।
विभागीय नियमानुसार एसपी द्वारा इन्हें कार्यमुक्त (Relieve) नहीं किया गया, जिसके बाद पीएचक्यू ने इनकी पदोन्नति का आदेश पूरी तरह निरस्त (रद्द) कर दिया।
प्रदेशभर के विभिन्न जिलों के अधिकारी शामिल:
यह कार्रवाई राज्य स्तर पर की गई है, जिसमें मध्य प्रदेश के अलग-अलग संभागों और जिलों के पुलिस अधिकारी शामिल हैं: भोपाल एवं इंदौर संभाग: भोपाल शहर, देहात, इंदौर नारकोटिक्स विंग तथा पीटीसी इंदौर। ग्वालियर-चंबल अंचल: ग्वालियर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी के अधिकारी। महाकौशल एवं विंध्य क्षेत्र: रीवा, मऊगंज, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा और मैहर बुंदेलखंड व मालवा अंचल: सागर (PTS सागर के अधिकारी), दमोह, छतरपुर, उज्जैन, रतलाम और मंदसौर
अधिकारियों की वर्तमान स्थिति:
पदोन्नति निरस्त होने के फलस्वरूप ये सभी 78 पुलिस अधिकारी फिलहाल अपने मूल/वर्तमान पद (उपनिरीक्षक/कार्यवाहक) पर ही कार्यरत रहेंगे। जब तक लंबित विभागीय मामलों का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता या सक्षम स्तर से राहत नहीं मिलती, तब तक नियमित पदोन्नति का लाभ देय नहीं होगा।