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टीकमगढ़। दिगौड़ा थाना क्षेत्र में कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश तैयार कर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कराने के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश भरकुंदिया की अदालत ने दोनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं में 5 साल तक के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक जटाशंकर श्रोती ने की।
मामले का खुलासा 10 दिसंबर 2020 को हुआ था। नायब तहसीलदार वृत्त दिगौड़ा की शिकायत पर दिगौड़ा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। एसडीओ जतारा न्यायालय में प्रचलित एक प्रकरण के आदेश दिनांक 27 अक्टूबर 2020 में सामने आया था कि आरोपी रामबगस और साथियों ने कलेक्टर न्यायालय टीकमगढ़ के नाम से 30 मई 2019 का फर्जी आदेश तैयार कराया था और पटवारी के जरिए राजस्व रिकॉर्ड में अमल करवाने का प्रयास किया था।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों और 16 दस्तावेजों के आधार पर आरोप प्रमाणित किए।
अदालत ने आरोपी रामबगस यादव (79) निवासी वैदौरा को धारा 420 व 468 में 4-4 साल, धारा 467 में 5 साल और 7 हजार अर्थदंड तथा धारा 471 में 2 साल के कारावास से दंडित किया है। वहीं दूसरे आरोपी हरनारायण खरे (66) निवासी जरूआ को धारा 120बी व 420 में 4-4 साल का सश्रम कारावास और 3-3 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।