पवई। नगर की जीवनदायिनी पतने नदी पर स्थित कलेहन घाट वर्तमान में श्रद्धालुओं के लिए एकमात्र प्रमुख एवं उपयोगी घाट बना हुआ है। नगर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोग प्रतिदिन यहां स्नान, पूजन-अर्चन, धार्मिक अनुष्ठान एवं अन्य सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बढ़ती आबादी और श्रद्धालुओं की संख्या के अनुपात में घाटों का विकास नहीं होने के कारण लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पवई नगर में पतने नदी के किनारे कलेहन घाट के अलावा कोई अन्य विकसित एवं व्यवस्थित घाट उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि सामान्य दिनों में भी यहां लोगों की भीड़ बनी रहती है, जबकि अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, सावन माह, नवरात्रि, मकर संक्रांति, कार्तिक स्नान एवं अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में एकमात्र घाट होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और घाट पर अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो जाती है।
नगरवासियों का कहना है कि कलेहन घाट धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां स्थित मां कलेही मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन करने से पहले अधिकांश श्रद्धालु पतने नदी में स्नान करते हैं। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, पिंडदान, मुंडन संस्कार एवं अन्य पारंपरिक कार्यक्रम भी इसी घाट पर संपन्न कराए जाते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव के कारण श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी
घाट पर महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, विश्राम स्थल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में महिलाएं स्नान एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती हैं, लेकिन कपड़े बदलने एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए उन्हें पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती। इससे महिलाओं को असुविधा और असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
सुरक्षा व्यवस्था भी नाकाफी
स्थानीय लोगों के अनुसार घाट के कई हिस्सों में सुरक्षा संबंधी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर फिसलन और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। घाट पर सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव होने से शाम एवं रात्रि के समय श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी होती है। बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं अक्सर असुरक्षित महसूस करती हैं।

नगर के विस्तार के साथ बढ़ी जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में पवई नगर का विस्तार हुआ है और आबादी में भी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पतने नदी के घाटों के विकास की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नदी के अन्य हिस्सों में भी घाटों का निर्माण कराया जाए तो कलेहन घाट पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकता है और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग
नगरवासियों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि पतने नदी के विभिन्न स्थानों पर नए घाटों का निर्माण कराया जाए। साथ ही कलेहन घाट का विस्तार कर वहां महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थल, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। बरसात के दौरान दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पतने नदी पवई नगर की आस्था का केंद्र है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों एवं सुविधाओं का विकास समय की आवश्यकता बन गया है। यदि शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में श्रद्धालुओं की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।