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पवई। नारायणपुरा में बोरवेल में उतरने के दौरान एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की घटना के बाद अब मामले की वैज्ञानिक जांच शुरू हो गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए ONGC देहरादून से विशेषज्ञों की टीम नारायणपुरा पहुंची, जहां टीम ने संबंधित बोरवेल से पानी और गैस के सैंपल लिए। इन सैंपलों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सैंपलों की जांच और प्रयोगशाला प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट आने में करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। रिपोर्ट के बाद ही बोरवेल में मौजूद पानी और गैस से जुड़े वास्तविक कारणों की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
बारिश में कुएं-बोरवेल में उतरना जानलेवा हो सकता है
जांच के दौरान विशेषज्ञ टीम ने ग्रामीणों को खुले बोरवेल और कुओं को लेकर महत्वपूर्ण सावधानी बताई। टीम ने मौखिक रूप से समझाया कि बरसात के मौसम में किसी भी खुले कुएं या बोरवेल में उतरने से पहले वहां ऑक्सीजन की उपलब्धता की जांच करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने ऑक्सीजन की मौजूदगी जांचने के लिए एक सरल प्रयोग का भी जिक्र किया। उनके अनुसार बाल्टी में मोमबत्ती जलाकर उसे कुएं या बोरवेल के अंदर नीचे तक ले जाकर लौ की स्थिति देखी जा सकती है। यदि मोमबत्ती बुझ जाती है तो वहां ऑक्सीजन की कमी होने की आशंका हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्राथमिक संकेत है, इसे सुरक्षित गैस/ऑक्सीजन जांच का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
तीन मौतों के बाद सुरक्षा पर सवाल
नारायणपुरा में बोरवेल से जुड़ी घटनाओं में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान जाने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। अब ONGC विशेषज्ञों द्वारा लिए गए पानी और गैस के सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि बोरवेल के भीतर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण यह हादसा इतना भयावह हो गया।